बिज़नेस – Himalayan Ganesha https://himalayanganesha.com National News Portal Tue, 11 Aug 2026 08:09:57 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 https://himalayanganesha.com/wp-content/uploads/2025/09/cropped-Screenshot-2025-09-05-114937-32x32.png बिज़नेस – Himalayan Ganesha https://himalayanganesha.com 32 32 सोने-चांदी के दाम में फिर उछाल, सोना 1.55 लाख के पार, चांदी भी 2.40 लाख के करीब https://himalayanganesha.com/2026/08/11/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%89/ Tue, 11 Aug 2026 08:09:57 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8406

जानिए आज क्या है ताजा भाव

नई दिल्ली। भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। सोमवार को कारोबार के दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, लेकिन दिन खत्म होते-होते कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। मंगलवार, 11 अगस्त को भी घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सोना और चांदी मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए।

इंटरनेशनल मार्केट में भी बढ़े Gold-Silver के भाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। मंगलवार सुबह करीब 9 बजे कॉमेक्स पर सोने का भाव लगभग 1.22 फीसदी बढ़कर 4,473.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

इसी तरह चांदी की कीमत में भी बढ़त देखी गई। कॉमेक्स पर चांदी करीब 1.02 फीसदी की तेजी के साथ 65.940 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती नजर आई।

MCX पर सोने ने पकड़ी रफ्तार

घरेलू वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी मंगलवार को सोने और चांदी दोनों में तेजी रही। कारोबार के दौरान सोने की कीमत में करीब 1,997 रुपये की बढ़त दर्ज की गई और यह 1,55,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

वहीं चांदी की कीमत में करीब 2,708 रुपये का उछाल आया। इसके बाद MCX पर चांदी 2,39,575 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती दिखाई दी।

आज कितने रुपये है सोने का भाव?

11 अगस्त को भारतीय बाजार में अलग-अलग कैरेट के सोने के भाव भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। उपलब्ध बाजार भाव के मुताबिक, 24 कैरेट सोना करीब 1,55,210 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है।

वहीं 22 कैरेट सोने का भाव करीब 1,42,276 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना करीब 1,16,408 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है।

चांदी भी 2.40 लाख रुपये के करीब

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमत में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है। भारतीय बाजार में चांदी का भाव करीब 2,40,340 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया है।

इस तरह मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में सोने-चांदी की कीमतें मजबूत रुख के साथ कारोबार करती नजर आ रही हैं। हालांकि, शहर, ज्वेलर और टैक्स के आधार पर खुदरा कीमतों में कुछ अंतर हो सकता है।

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तांबा-एल्युमीनियम की कीमतों में आई उछाल, घरेलू उपकरणों और EV की कीमतें बढ़ने के आसार https://himalayanganesha.com/2026/08/07/copper-and-aluminium-prices-surge-prices-of-home-appliances-and-evs-likely-to-rise/ Fri, 07 Aug 2026 07:40:36 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8298

TV, AC, फ्रिज और कारें 8% तक हो सकती हैं महंगी

नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लग सकता है। तांबा, एल्युमीनियम, जिंक और अन्य औद्योगिक धातुओं की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर जल्द ही टीवी, फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन, स्मार्टफोन और ऑटोमोबाइल जैसे उत्पादों की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। उद्योग जगत का अनुमान है कि कई घरेलू उपकरण 5 से 8 फीसदी तक महंगे हो सकते हैं।

वैश्विक बाजार में औद्योगिक धातुओं की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ने लगा है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में तांबे की कीमत तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसके साथ ही भारत में भी तांबे का भाव बढ़कर 1304.90 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, जबकि एक महीने पहले इसकी कीमत 1187.85 रुपये प्रति किलोग्राम थी। एल्युमीनियम, जिंक, टिन और अन्य धातुओं के दामों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक इस तेजी की सबसे बड़ी वजह कांगो द्वारा कॉपर और कोबाल्ट कंसंट्रेट के निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से माल ढुलाई प्रभावित हो रही है, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। वहीं, चीन और अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य हाई-टेक उद्योगों की बढ़ती मांग ने भी तांबे समेत कई धातुओं की कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया है।

औद्योगिक धातुओं की महंगाई का असर अब उपभोक्ता बाजार पर भी दिखाई देने की संभावना है। टीवी, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में तांबा और एल्युमीनियम का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। वहीं, कारों और इलेक्ट्रिक वाहनों में भी इन धातुओं की अहम भूमिका होती है। ऐसे में कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने से त्योहारी सीजन के दौरान इन उत्पादों की कीमतों में 5 से 8 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि एयर कंडीशनर के कंप्रेसर और कंडेंसर, वॉशिंग मशीन की मोटर, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, वायरिंग सिस्टम और स्मार्टफोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में तांबे का कोई सस्ता विकल्प उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कच्चे माल की बढ़ी लागत का बोझ कंपनियां उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं।

प्रमुख धातुओं की मौजूदा कीमतें (रुपये प्रति किलोग्राम):

तांबा: 1304.90 रुपये (करीब 9.85% की बढ़ोतरी)
एल्युमीनियम: 282.57 रुपये (5.08% की बढ़ोतरी)
जिंक: 329.38 रुपये (6.82% की बढ़ोतरी)
टिन: 4879.24 रुपये (10.16% की बढ़ोतरी)
लेड: 164.75 रुपये (0.82% की बढ़ोतरी)

यदि धातुओं की कीमतों में यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को घरेलू उपकरणों से लेकर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तक के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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एलआईसी के ओएफएस को जबरदस्त रिस्पॉन्स, सरकार को मिले 31,552 करोड़ रुपये https://himalayanganesha.com/2026/08/06/tremendous-response-to-lics-ofs-government-gets-rs-31552-crore/ Thu, 06 Aug 2026 06:54:08 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8266

दो दिन में पूरी हुई एलआईसी की शेयर बिक्री

नई दिल्ली। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) को निवेशकों का शानदार समर्थन मिला है। सरकार ने इस प्रक्रिया के तहत ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया, जिससे दो दिनों के भीतर शेयर बिक्री सफलतापूर्वक पूरी हो गई। इस कदम के साथ एलआईसी में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई, जो नियामकीय तय समयसीमा से पहले ही हासिल कर ली गई। इस ओएफएस के जरिए 82 करोड़ से अधिक शेयर आवंटित किए गए, जिससे सरकार को करीब 31,552 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

क्या होता है ओएफएस?

ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए किसी सूचीबद्ध कंपनी के मौजूदा बड़े शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच सकते हैं। एलआईसी के मामले में यह बिक्री भारत सरकार द्वारा की गई है। इसमें कंपनी ने कोई नए शेयर जारी नहीं किए हैं, इसलिए इस सौदे से मिलने वाली पूरी राशि सरकार के खाते में जाएगी, जबकि एलआईसी की शेयर पूंजी में कोई बदलाव नहीं होगा।

सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने का उद्देश्य

इससे पहले एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत थी और आम निवेशकों के पास केवल 3.5 प्रतिशत शेयर थे। ओएफएस के जरिए सरकार ने अपनी हिस्सेदारी घटाकर सार्वजनिक निवेशकों की भागीदारी बढ़ाई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एलआईसी को 16 मई 2027 तक कम से कम 10 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया था, जिसे कंपनी ने तय समय से पहले ही पूरा कर लिया।

शेयर कीमतों पर क्यों पड़ा असर?

सरकार ने ओएफएस के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया, जो घोषणा से पहले एलआईसी के बंद भाव 428.50 रुपये से लगभग 10.9 प्रतिशत कम था। कम कीमत पर शेयर उपलब्ध होने की वजह से निवेशकों का रुझान ओएफएस की ओर बढ़ा और खुले बाजार में खरीदारी धीमी पड़ गई। इसके अलावा, बाजार में शेयरों की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर भी अल्पकालिक दबाव देखने को मिला।

वित्तीय प्रदर्शन रहा मजबूत

एलआईसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने परिचालन प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। कंपनी के नए व्यवसाय का मूल्य (वीएनबी) 41.6 प्रतिशत बढ़कर 14,179 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि वीएनबी मार्जिन 17.6 प्रतिशत से बढ़कर 21.2 प्रतिशत हो गया। वहीं कंपनी का शुद्ध लाभ 19.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 57,419 करोड़ रुपये रहा, जो उसके मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत है।

 

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वैश्विक तनाव के बीच भी बढ़ा भारत का चावल निर्यात, पहली छमाही में 5% की बढ़ोतरी https://himalayanganesha.com/2026/07/29/indias-rice-exports-rise-despite-global-tensions-5-increase-in-the-first-half/ Wed, 29 Jul 2026 11:40:46 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8046

चावल के साथ मक्का और गेहूं के निर्यात में भी उछाल

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत के चावल निर्यात में मजबूती देखने को मिली है। साल 2026 की पहली छमाही में देश का कुल चावल निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में करीब पांच फीसदी बढ़ा है। खासतौर पर गैर-बासमती चावल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग ने निर्यात को नई रफ्तार दी है, जबकि बासमती चावल के निर्यात में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

साल 2026 के पहले छह महीनों में भारत ने कुल 12.27 मिलियन मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 11.68 मिलियन मीट्रिक टन की तुलना में लगभग पांच फीसदी अधिक है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने चावल निर्यात में अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखी है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है और वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी 40 फीसदी से अधिक मानी जाती है। भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धी कीमतों और पर्याप्त उपलब्धता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बनी हुई है।

बासमती चावल के निर्यात में आई गिरावट

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में बासमती चावल का निर्यात करीब 5.5 फीसदी घटकर 3.36 मिलियन मीट्रिक टन रह गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान सहित कुछ खाड़ी देशों में व्यापार प्रभावित होने से इसका असर बासमती निर्यात पर पड़ा।

हालांकि, गैर-बासमती चावल के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका निर्यात 9.6 फीसदी बढ़कर 8.9 मिलियन मीट्रिक टन पहुंच गया। अफ्रीकी देशों से बढ़ती मांग ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई।

भारत को क्यों मिला फायदा?

व्यापार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में चावल का पर्याप्त भंडार होने के कारण इसकी कीमतें अन्य प्रमुख निर्यातक देशों जैसे थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं। यही वजह है कि कई देशों ने भारतीय चावल की खरीद बढ़ाई है।

भारत मुख्य रूप से बांग्लादेश, बेनिन, आइवरी कोस्ट, गिनी और कैमरून जैसे देशों को गैर-बासमती चावल निर्यात करता है, जबकि प्रीमियम बासमती चावल की प्रमुख मांग सऊदी अरब, इराक, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आती है।

मक्का और गेहूं के निर्यात में भी बढ़ोतरी

चावल के अलावा अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। पहले छह महीनों में मक्का का निर्यात 400 फीसदी बढ़कर 1.42 मिलियन मीट्रिक टन पहुंच गया। रिकॉर्ड उत्पादन और घरेलू बाजार में कम कीमतों के कारण वियतनाम, बांग्लादेश और मलेशिया जैसे देशों से इसकी मांग बढ़ी।

वहीं, गेहूं का निर्यात भी पिछले वर्ष के मुकाबले कई गुना बढ़कर 1,61,187 टन तक पहुंच गया। नेपाल द्वारा भारतीय गेहूं की खरीद शुरू किए जाने और निर्यात संबंधी प्रतिबंधों में राहत मिलने से इस क्षेत्र को भी मजबूती मिली।

वैश्विक बाजार में बनी रहेगी भारत की मजबूत पकड़

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मौसम संबंधी चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां जरूर असर डाल सकती हैं, लेकिन पर्याप्त उत्पादन और मजबूत निर्यात क्षमता के चलते भारत वैश्विक चावल बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने में सक्षम रहेगा। गैर-बासमती चावल की लगातार बढ़ती मांग भारतीय कृषि निर्यात को और मजबूती दे सकती है।

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सोने-चांदी की कीमतों में फिर आई तेजी, नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत रही मजबूत https://himalayanganesha.com/2026/07/27/gold-and-silver-prices-rise-again-the-new-trading-week-gets-off-to-a-strong-start/ Mon, 27 Jul 2026 10:24:05 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=7976

नई दिल्ली-  पिछले पूरे सप्ताह सोने-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। जहां सप्ताह के शुरुआती दिनों में तेजी रही, वहीं आखिरी कारोबारी दिनों में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, नए कारोबारी सप्ताह के पहले दिन 27 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने-चांदी के दामों में फिर से रिकवरी और उछाल दर्ज किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) का हाल

ग्लोबल मार्केट (Comex) में हफ्ते की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। सुबह 9 बजे के आंकड़ों के मुताबिक:

सोना: 0.56% की तेजी के साथ 4,093.00 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।

चांदी: 1.31% बढ़कर 59.675 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है।

घरेलू बाजार (MCX) पर बढ़त

भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर भी कीमती धातुओं में उछाल देखने को मिला:

सोना (Gold Rate): MCX पर सोना 678 रुपये (0.67%) की छलांग लगाकर ₹1,43,784 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता नजर आया।

चांदी (Silver Rate): चांदी में भी मजबूती दिखी और यह 1.09% चढ़कर लगभग ₹2,24,550 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती पाई गई।

देश के प्रमुख शहरों में आज के भाव (प्रति 10 ग्राम / प्रति किलो)

शहर              24K सोना (रु.)          22K सोना (रु.)            18K सोना (रु.)                    चांदी (रु./किग्रा)
नई दिल्ली          ₹1,43,270                   ₹1,31,331                        ₹1,07,020                              ₹2,22,580
मुंबई                 ₹1,44,840                   ₹1,32,770                         ₹1,08,630                             ₹2,22,310
पटना                ₹1,44,760                   ₹1,32,578                         ₹1,07,655                              ₹2,23,850
जयपुर              ₹1,43,410                    ₹1,32,126                         ₹1,08,558                              ₹2,24,060
कानपुर            ₹1,42,517                     ₹1,31,181                          ₹1,07,110                               ₹2,22,920

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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.23 अरब डॉलर पहुंचा, आरबीआई के ताजा आंकड़े जारी https://himalayanganesha.com/2026/07/25/indias-foreign-exchange-reserves-rise-to-676-23-billion-rbi-releases-latest-data/ Sat, 25 Jul 2026 08:07:05 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=7942

फॉरेक्स रिजर्व में 1.08 अरब डॉलर का इजाफा

नई दिल्ली। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 1.08 अरब डॉलर बढ़कर 676.237 अरब डॉलर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में यह बढ़ोतरी भारत की आर्थिक मजबूती और बाहरी भुगतान क्षमता के लिए सकारात्मक संकेत है।

आरबीआई द्वारा जारी साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) में हुई वृद्धि रही। समीक्षाधीन सप्ताह में यह घटक 4.549 अरब डॉलर बढ़कर 551.057 अरब डॉलर तक पहुंच गया। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं भी शामिल होती हैं, जिनके विनिमय दर में बदलाव का असर कुल भंडार पर पड़ता है।

हालांकि, इसी अवधि में देश के स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) के मूल्य में कमी दर्ज की गई। आरबीआई के अनुसार, गोल्ड रिजर्व 3.48 अरब डॉलर घटकर 101.749 अरब डॉलर रह गया। वहीं, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 44 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 18.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की आरक्षित स्थिति 32 मिलियन डॉलर घटकर 4.761 अरब डॉलर रह गई।

इस वर्ष फरवरी के अंत में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण इसमें गिरावट देखने को मिली। उस दौरान रुपये पर दबाव कम करने के लिए आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए डॉलर की बिक्री भी की थी।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मौजूदा स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत बने रहना भारत की आयात क्षमता, रुपये की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने की क्षमता को मजबूती प्रदान करता है।

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आईडीबीआई बैंक के विनिवेश को मिली रफ्तार, 53 हजार करोड़ रुपये के सौदे में अंतिम चरण में पहुंची प्रक्रिया https://himalayanganesha.com/2026/07/23/idbi-bank-disinvestment-gains-momentum-process-reaches-final-stage-in-%e2%82%b953000-crore-deal/ Thu, 23 Jul 2026 07:21:08 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=7872

नई दिल्ली: भारतीय बैंकिंग इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) IDBI बैंक में अपनी संयुक्त 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। कनाडा की प्रमुख निवेश कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स इस करीब 53,000 करोड़ रुपये के बड़े सौदे को अंजाम देने की तैयारी में है। इस अधिग्रहण के लिए प्रति शेयर दर लगभग 81 रुपये तय की गई है, जो देश के बैंकिंग सेक्टर में अब तक के सबसे बड़े विदेशी प्रत्यक्ष निवेशों में से एक माना जा रहा है।

वर्ष 1964 में एक विकास वित्तीय संस्थान के रूप में शुरू हुआ IDBI बैंक 2004 में वाणिज्यिक बैंक बना। हालांकि, 2010 के बाद बढ़ते डूबे कर्ज (NPA) के कारण बैंक गहरे संकट में घिर गया और 2018 तक इसका ग्रॉस एनपीए 28 प्रतिशत तक जा पहुंचा। इसके बाद 2019 में एलआईसी ने 51 फीसदी नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल कर बैंक को उबारने का काम किया। इस कदम से बैंक की वित्तीय सेहत में अभूतपूर्व सुधार हुआ, जिसका नतीजा यह रहा कि वित्त वर्ष 2026 में बैंक का शुद्ध लाभ 27% बढ़कर 9,513 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं ग्रॉस एनपीए घटकर 2.32% और नेट एनपीए महज़ 0.15% पर सिमट गया।

इस विनिवेश को मई 2021 में कैबिनेट की मंजूरी मिली थी और अक्टूबर 2022 में इसके लिए बोलियां आमंत्रित की गई थीं। हालांकि मार्च 2026 में कम बोली के कारण सौदा रुक गया था, लेकिन जुलाई 2026 में फेयरफैक्स द्वारा संशोधित और बेहतर प्रस्ताव पेश करने के बाद इसे दोबारा रफ्तार मिली।

इस प्रक्रिया से सरकार को करीब 26,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, जो यह स्पष्ट संदेश देता है कि सरकार अब बैंकों के स्थायी संचालन से बाहर होना चाहती है। फेयरफैक्स को इस सौदे से एक मजबूत वित्तीय आधार और स्वच्छ परिसंपत्तियों वाला विशाल बैंकिंग प्लेटफॉर्म मिलेगा। फिलहाल, पूरा बाजार इस सौदे के अंतिम रूप लेने और नए प्रबंधन की रणनीतियों पर पैनी नजर बनाए हुए है।

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सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का मुनाफा 13% बढ़ा, पहली तिमाही में 1,324 करोड़ रुपये का लाभ https://himalayanganesha.com/2026/07/17/central-bank-of-indias-profit-rises-13-posts-profit-of-%e2%82%b91324-crore-in-the-first-quarter/ Fri, 17 Jul 2026 09:57:24 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=7712

एनपीए घटा, मुनाफा बढ़ा; सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नतीजों ने किया प्रभावित

नई दिल्ली। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक ने इस दौरान मुनाफे में दोहरे अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की है। बेहतर ब्याज आय, घटते एनपीए और कम प्रावधान के चलते बैंक का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा, जिससे उसकी बैलेंस शीट पहले की तुलना में और अधिक सुदृढ़ दिखाई दे रही है।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से जारी वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 को समाप्त तिमाही में बैंक का शुद्ध लाभ बढ़कर 1,324 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 1,169 करोड़ रुपये था। इस तरह बैंक के मुनाफे में करीब 13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है।

आय और ब्याज कमाई में सुधार

बैंक की कुल आय में भी इस तिमाही के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली। अप्रैल-जून 2026 में बैंक की कुल आय 10,678 करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले यह 10,360 करोड़ रुपये थी। वहीं, कर्ज पर मिलने वाली ब्याज आय बढ़कर 9,691 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 8,589 करोड़ रुपये थी। इससे स्पष्ट है कि बैंक के ऋण कारोबार में मजबूती बनी हुई है।

परिचालन लाभ में हल्की गिरावट

हालांकि बैंक के परिचालन लाभ में मामूली कमी दर्ज की गई। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में परिचालन लाभ 2,186 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2,304 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद बैंक ने लागत नियंत्रण और प्रावधान में कमी के जरिए शुद्ध लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हासिल की।

एनपीए में सुधार से मिली बड़ी राहत

बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया है। जून 2026 के अंत तक ग्रॉस एनपीए घटकर 2.60 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 3.13 प्रतिशत था। वहीं, नेट एनपीए 0.49 प्रतिशत पर स्थिर बना रहा। खराब ऋणों में कमी आने से बैंक को प्रावधान घटाने में मदद मिली। इस दौरान प्रावधान 468 करोड़ रुपये से घटकर 346 करोड़ रुपये रह गया, जिससे मुनाफे पर सकारात्मक असर पड़ा।

पूंजी स्थिति हुई और मजबूत

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio) भी मजबूत हुआ है। जून 2026 तिमाही के अंत तक यह बढ़कर 18.28 प्रतिशत पहुंच गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 17.66 प्रतिशत था। इससे बैंक की वित्तीय क्षमता और भविष्य में कारोबार विस्तार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

सकारात्मक संकेत

पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया लगातार अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत कर रहा है। मुनाफे में बढ़ोतरी, बेहतर ब्याज आय, घटते एनपीए और मजबूत पूंजी आधार बैंक के प्रदर्शन के सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि परिचालन लाभ में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन कुल मिलाकर बैंक का वित्तीय प्रदर्शन निवेशकों और बाजार के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है।

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OpenAI ला सकता है ChatGPT वाला AI Speaker, बिना स्क्रीन करेगा स्मार्ट होम कंट्रोल https://himalayanganesha.com/2026/07/16/openai-may-launch-a-chatgpt-powered-ai-speaker-capable-of-controlling-smart-home-devices-without-a-screen/ Thu, 16 Jul 2026 06:36:04 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=7679

OpenAI अपने पहले कंज्यूमर हार्डवेयर डिवाइस पर काम कर रहा है, जिसे एक स्क्रीनलेस AI स्मार्ट स्पीकर बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह डिवाइस ChatGPT की एडवांस्ड वॉयस टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा और यूजर्स के लिए एक AI साथी (AI Companion) की तरह काम करेगा। इसमें कैमरा और कई सेंसर दिए जा सकते हैं, जिससे यह आसपास के माहौल को समझकर अधिक प्राकृतिक तरीके से बातचीत कर सकेगा। यह डिवाइस स्मार्ट होम कंट्रोल, म्यूजिक प्लेबैक, मैसेजिंग और सवालों के जवाब देने जैसे फीचर्स के साथ आ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक OpenAI इस डिवाइस को पारंपरिक स्मार्ट स्पीकर से अलग अनुभव देने की तैयारी में है। इसमें GPT-Live वॉयस टेक्नोलॉजी और कुछ मैकेनिकल मूवमेंट्स भी हो सकते हैं, जिससे यह अधिक मानवीय महसूस होगा। इस प्रोजेक्ट पर पूर्व Apple डिज़ाइन प्रमुख जॉनी आइव की टीम भी काम कर रही है। हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक लॉन्च डेट या कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसे OpenAI की हार्डवेयर रणनीति का बड़ा कदम माना जा रहा है।

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मुनाफावसूली से सोना-चांदी में बड़ी गिरावट https://himalayanganesha.com/2026/01/27/profit-taking-leads-to-a-sharp-decline-in-gold-and-silver-prices/ Tue, 27 Jan 2026 08:09:02 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=5315

रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद चांदी 7% से ज्यादा टूटी, सोना भी फिसला

नई दिल्ली- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं पर दबाव देखने को मिला है। ऊंचे स्तरों पर पहुंचने के बाद निवेशकों द्वारा लाभ सुरक्षित करने की रणनीति अपनाए जाने से सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। खास तौर पर चांदी के दामों में तेज टूट देखने को मिली, जबकि सोना भी कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया।

वैश्विक वायदा बाजार में सोने के भाव में मामूली गिरावट दर्ज की गई, हालांकि यह अब भी मनोवैज्ञानिक रूप से अहम स्तर से ऊपर बना हुआ है। वहीं चांदी, जो हाल ही में ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंची थी, वहां से फिसलकर नीचे आ गई। जानकारों के मुताबिक, रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचने के बाद भारी बिकवाली ने चांदी की चाल को अचानक पलट दिया।

घरेलू बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में सोने और चांदी के दाम ऊंचे बने हुए हैं। 24 कैरेट सोने की कीमत नए स्तर पर पहुंच गई है, जबकि चांदी भी प्रति किलो रिकॉर्ड भाव पर कारोबार कर रही है। दिल्ली, मुंबई और पटना जैसे प्रमुख शहरों में सोने के अलग-अलग कैरेट और चांदी के दाम ऊंचे स्तर पर दर्ज किए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि साल की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में मजबूत तेजी देखने को मिली है। कमजोर डॉलर, सरकारी बॉन्ड से घटता रुझान और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। निवेशक मुद्रा की घटती क्रय शक्ति के डर से सोने-चांदी जैसी वास्तविक संपत्तियों को सुरक्षित विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद लंबी अवधि में कीमती धातुओं का रुझान सकारात्मक बना रह सकता है। वैश्विक अस्थिरता, राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के माहौल में सोना और चांदी निवेशकों के लिए सुरक्षा कवच की भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली के चलते कीमतों में बीच-बीच में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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