राष्ट्रीय – Himalayan Ganesha https://himalayanganesha.com National News Portal Tue, 11 Aug 2026 06:51:04 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 https://himalayanganesha.com/wp-content/uploads/2025/09/cropped-Screenshot-2025-09-05-114937-32x32.png राष्ट्रीय – Himalayan Ganesha https://himalayanganesha.com 32 32 पीएम मोदी समेत NDA सांसदों ने लहराया तिरंगा, झारखंड छात्र प्रदर्शन पर संसद में प्रदर्शन https://himalayanganesha.com/2026/08/11/nda-mps-including-pm-modi-waved-the-tricolour-protest-held-in-parliament-over-the-student-agitation-in-jharkhand/ Tue, 11 Aug 2026 06:51:04 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8393

‘वंदे मातरम’ के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम

नई दिल्ली। संसद सत्र के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों की मंगलवार को अहम बैठक हुई। संसद पुस्तकालय में आयोजित ‘मंगल मिलन’ बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष के साथ हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत NDA के कई नेता हाथों में तिरंगा लिए नजर आए।

बैठक के बाद NDA सांसदों ने संसद परिसर में झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। सांसदों ने आरोप लगाया कि झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। इस मुद्दे को संसद में भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।

छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की तैयारी

NDA सांसद संसद में पोस्टर के साथ पहुंचने की तैयारी में हैं। इन पोस्टरों के जरिए सरकार की ओर से छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा की मांग और विपक्ष के रुख को लेकर सवाल उठाए जाएंगे। साथ ही झारखंड सरकार पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया जाएगा।

NDA सांसदों का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष की ओर से लगातार हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। ऐसे में सत्ता पक्ष की रणनीति संसद में विपक्ष को इन मुद्दों पर घेरने की है।

पिछली बैठक में सरकार की उपलब्धियों पर हुई थी चर्चा

इससे पहले पिछले सप्ताह हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद भाजपा सांसदों ने सरकार के कामकाज और विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का जिक्र किया था। बैठक में रोजगार, आर्थिक विकास, खेल, गरीबी उन्मूलन और संसद की कार्यवाही जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने दावा किया था कि भारत तेजी से आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रोजगार की स्थिति में सुधार और बेरोजगारी में कमी का जिक्र करते हुए कहा था कि बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

वहीं, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के बजाय विपक्ष हंगामा कर रहा है। बैठक में सांसदों से सदन की कार्यवाही के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहने और जरूरी विधेयकों को पारित कराने में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया गया था।

क्या है ‘मंगल मिलन’ बैठक?

‘मंगल मिलन’ NDA संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीतिक बैठक का नया स्वरूप है। इसका मुख्य उद्देश्य गठबंधन के घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और संसद की कार्यवाही को लेकर साझा रणनीति तैयार करना है।

संसद सत्र के दौरान इस बैठक में आगामी कार्यवाही, महत्वपूर्ण मुद्दों और सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाती है। साथ ही सहयोगी दलों के सांसदों के बीच तालमेल और सदन में उनकी भूमिका को लेकर भी रणनीति बनाई जाती है।

बैठक में भाजपा के अलावा शिवसेना, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP), तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) समेत NDA के विभिन्न सहयोगी दलों के नेता हिस्सा लेते हैं। इसका उद्देश्य गठबंधन के सांसदों को एक साझा रणनीति के तहत संसद में प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने के लिए तैयार करना है।

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महिला आरक्षण कानून पर फिर गरमाई सियासत, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा https://himalayanganesha.com/2026/08/08/politics-heats-up-again-over-womens-reservation-law-rahul-gandhi-attacks-the-government/ Sat, 08 Aug 2026 10:20:59 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8345

राहुल गांधी बोले- कानून लागू करने में देरी क्यों?

नई दिल्ली। महिला आरक्षण कानून को लागू करने को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच सियासी तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले ही महिला आरक्षण कानून का समर्थन कर चुकी है। उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को लागू करने में देरी क्यों हो रही है और इसे लोकसभा परिसीमन से जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद में कांग्रेस के समर्थन से पारित हुआ था। ऐसे में अब इसे लागू करने के लिए किसी नई शर्त की जरूरत नहीं होनी चाहिए। राहुल ने सरकार से कानून को बिना शर्त लागू करने की मांग की।

रिजिजू ने कांग्रेस से मांगा था समर्थन

दरअसल, यह विवाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान के बाद सामने आया। राहुल गांधी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं की आवाज और उनकी भागीदारी के बिना देश का विकास अधूरा रहेगा।

राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने इसे कांग्रेस की ओर से सकारात्मक संदेश बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस से महिला आरक्षण विधेयक को बिना शर्त समर्थन देने की चुनौती भी दी।

कांग्रेस की आपत्ति किस बात पर है?

कांग्रेस और विपक्षी दल महिला आरक्षण के प्रावधान का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन परिसीमन के साथ इसे जोड़ने का विरोध करते हैं। विपक्ष की दलील है कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने को लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं किया जाना चाहिए।

परिसीमन के जरिए लोकसभा की सीटों की संख्या और उनके क्षेत्र का पुनर्निर्धारण किया जाना प्रस्तावित है। विपक्ष चाहता है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखते हुए इसे जल्द लागू किया जाए।

2023 में संसद से पारित हुआ था कानून

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रिया परिसीमन और उससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया से संबद्ध है।

दिए गए विवरण के मुताबिक, 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान संशोधन से जुड़ा एक विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके चलते कानून को लागू करने की आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

अब राहुल गांधी के बयान के बाद महिला आरक्षण कानून का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस जहां इसे बिना शर्त लागू करने की मांग कर रही है, वहीं केंद्र और विपक्ष के बीच परिसीमन को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

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झारखंड छात्र आंदोलन ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें, छात्रों ने किया विधानसभा घेराव का ऐलान https://himalayanganesha.com/2026/08/06/jharkhand-student-movement-increased-the-problems-of-the-government-students-announced-assembly-siege/ Thu, 06 Aug 2026 07:30:28 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8269

विपक्ष भी खुलकर आया समर्थन में

झारखंड।  झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है और अब यह राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। आंदोलन में बढ़ती भागीदारी और सोशल मीडिया पर मिल रहे व्यापक समर्थन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने पहली बार प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की पहल की है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने भी आंदोलन को समर्थन देकर राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। छात्रों ने 7 और 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की घोषणा की है, जिससे आने वाले दिनों में टकराव की स्थिति बनने की संभावना है।

बुधवार को आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र जुटे रहे। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और आंदोलनकारियों के सामने वार्ता का प्रस्ताव रखा। छात्रों ने कहा कि वे आपसी चर्चा के बाद इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेंगे।

भाजपा ने दिया आंदोलन को समर्थन

नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भाजपा प्रतिनिधिमंडल के साथ जयपाल सिंह मुंडा स्थल पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों के समर्थन का ऐलान किया। भाजपा ने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की।

आंदोलन में दिखने लगी अंदरूनी खींचतान

छात्र आंदोलन के भीतर मतभेद भी सामने आने लगे हैं। आंदोलन के संयोजकों में शामिल रामअवतार महतो ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने आंदोलन का राजनीतिकरण कर दिया है। उन्होंने कोचिंग संचालक कुणाल और उनके साथियों पर आंदोलन पर नियंत्रण करने, राजनीतिक फंडिंग लेने और क्राउड फंडिंग के जरिए बड़ी रकम जुटाने जैसे आरोप लगाए। हालांकि, कुणाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए रामअवतार पर ही आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाया।

दूसरे राज्यों में भी छात्रों का विरोध जारी

झारखंड के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी छात्र विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

पंजाब: पेपर लीक के विरोध में युवा कांग्रेस और एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने विधानसभा मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछारें कीं और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

राजस्थान: जयपुर स्थित सरकारी आनंदीलाल पोद्दार सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मूक-बधिर छात्रों ने स्कूल में खराब बुनियादी सुविधाओं के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्रों ने गंदे शौचालय, पेयजल की कमी और जर्जर भवन जैसी समस्याएं उठाईं। विरोध के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल के प्रिंसिपल को पद से हटा दिया और व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए।

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वैश्विक संस्कृत अनुसंधान में भारत-नेपाल पहल का उत्तराखंड ने किया नेतृत्व https://himalayanganesha.com/2026/08/06/uttarakhand-spearheaded-the-india-nepal-initiative-in-global-sanskrit-research/ Thu, 06 Aug 2026 05:20:57 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8256

देहरादून/नई दिल्ली। प्रदेश के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में नेपाल के कार्यवाहक राजदूत महामहिम डॉ. सुरेन्द्र थापा से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान संस्कृत के बढ़ते वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए भारत और नेपाल के मध्य गहन शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि संस्कृत के क्षेत्र में अनुसंधान, विद्वत्ता तथा शैक्षिक अवसरों को नई गति प्रदान की जा सके।

सचिव, संस्कृत शिक्षा ने बताया कि इस दौरान नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा ने संस्कृत के संवर्धन हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए नेपाल की संस्कृत विद्वत्ता और साहित्यिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के मध्य शैक्षणिक सहयोग शिक्षण पद्धतियों के आदान-प्रदान तथा भारतीय संस्कृत विद्वानों के सतत मार्गदर्शन से नेपाल में संस्कृत शिक्षा एवं अनुसंधान को नई गति मिलेगी तथा इसे वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।

भेंट के दौरान सचिव दीपक कुमार ने नेपाल के राजदूत को अवगत कराया कि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह सदैव इस बात पर विश्वास रखते हैं कि संस्कृत सीखना अत्यंत सरल है। उन्होंने युवाओं के बीच संस्कृत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय के महत्व पर भी विशेष बल दिया है, जिससे संस्कृत के शुद्ध उच्चारण को सभी के लिए सहज बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि उत्तराखंड संस्कृत को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, संस्कृत साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सदैव समर्पित रहे हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य के सभी 13 जनपदों में 13 संस्कृत ग्रामों की स्थापना की गई है। 28 अगस्त 2026 को संस्कृत दिवस के अवसर पर संस्कृत ग्राम, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् तथा राज्यभर के विभिन्न गुरुकुल संगोष्ठियों, व्याख्यानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं एवं जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से आधुनिक समाज में संस्कृत की शाश्वत प्रासंगिकता का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे।

नेपाल द्वारा जून 2025 में आयोजित 19 वें विश्व संस्कृत सम्मेलन में विश्वभर के प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं संस्कृत प्रेमियों ने सहभागिता की। इस सम्मेलन ने, संस्कृत अध्ययन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की। दीपक कुमार ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के मध्य होने वाला समझौता ज्ञापन शैक्षणिक आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, शिक्षक एवं छात्र सहयोग तथा संस्कृत अध्ययन के संवर्धन के लिए नए अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल का संबंध संस्कृत, सनातन परंपराओं, दर्शन, साहित्य तथा समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित एक अद्वितीय सभ्यतागत संबंध है। सदियों से संस्कृत दोनों देशों के लोगों को एक साझा बौद्धिक एवं आध्यात्मिक आधार प्रदान करती रही है।

इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज के संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य एवं वरिष्ठ संस्कृत पत्रकार डॉ. सुनील जोशी भी उपस्थित रहे। बैठक में दोनों देशों के युवा शोधार्थियों एवं विद्वानों को संयुक्त शोध परियोजनाओं, शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा संयुक्त प्रकाशनों के लिए प्रोत्साहित करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई. जिससे भारत-नेपाल के सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

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राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेताओं का संसद परिसर में प्रदर्शन, सरकार पर बोला हमला https://himalayanganesha.com/2026/08/05/opposition-leaders-including-rahul-and-priyanka-stage-a-protest-in-the-parliament-complex-and-attack-the-government/ Wed, 05 Aug 2026 07:12:29 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8226

प्रियंका गांधी बोलीं- लोकतंत्र में जवाबदेही जरूरी

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के बीच बुधवार को विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर दिया। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में मार्च निकालते हुए छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और अन्य मामलों को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने संसद परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता प्रेरणा स्थल स्थित गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक पैदल पहुंचे। इस दौरान सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विभिन्न मुद्दों पर विरोध दर्ज कराया।

छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल

विपक्षी नेताओं ने 20 जुलाई को छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ सख्ती बरती गई, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं, विरोध मार्च को देखते हुए संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई।

प्रियंका गांधी ने सरकार से मांगा जवाब

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग, पैलेट गन, आंसू गैस या लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

मोहम्मद जावेद ने भी उठाई कार्रवाई की मांग

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया, लेकिन उनके साथ कथित तौर पर हिंसक व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को चोटें आईं और जिन पर बल प्रयोग किया गया, उस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

विपक्षी दलों ने संकेत दिए कि वे इन मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर लगातार उठाते रहेंगे तथा सरकार से जवाब मांगते रहेंगे।

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भिवंडी में दर्दनाक हादसा- चार मंजिला इमारत का हिस्सा ढहा, छह की मौत https://himalayanganesha.com/2026/07/31/tragic-incident-in-bhiwandi-part-of-a-four-storey-building-collapses-six-dead/ Fri, 31 Jul 2026 05:42:03 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8088

कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

भिवंडी (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के भिवंडी शहर में देर रात एक बड़ा हादसा हो गया, जब एक चार मंजिला रिहायशी इमारत का हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका के चलते राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

जानकारी के अनुसार, यह हादसा बालाजी नगर स्थित कोहिनूर बिल्डिंग में रात करीब 11:30 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत में पहले से मरम्मत का कार्य चल रहा था और हादसे से कुछ समय पहले भवन में दरारों जैसी आवाजें सुनाई दी थीं। खतरे का आभास होने पर कई लोग समय रहते बाहर निकल गए, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।

राहत कार्य के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने मलबे से एक महिला को जीवित बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं मलबा हटाने के दौरान कई शव भी बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी भी सात से आठ लोगों के दबे होने की आशंका है, इसलिए बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।

हादसे में बच निकले दीपक कुमार यादव ने बताया कि पड़ोसी हिस्से के खंभों की मरम्मत का काम चल रहा था। रात में अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी, जिसके बाद चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी।

इसी बीच स्थानीय निवासी नेहा सिंह अपने लापता पति की तलाश में घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि उनके पति किसी काम से नीचे गए थे और कुछ ही मिनट बाद पूरी इमारत का हिस्सा ढह गया। तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है, हालांकि मोबाइल फोन पर घंटी जा रही है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, चार मंजिला इस इमारत में कुल 48 कमरे थे और इसे पहले ही जर्जर एवं खतरनाक घोषित किया जा चुका था। इसके बावजूद भवन में मरम्मत का कार्य जारी था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत की ‘बी’ विंग अचानक ढह गई, जिससे यह हादसा हुआ।

फिलहाल घटनास्थल पर एनडीआरएफ, ठाणे डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। डॉग स्क्वॉड, एंबुलेंस और भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

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लोकसभा में हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पारित https://himalayanganesha.com/2026/07/29/anti-paper-leak-amendment-bill-2026-passed-amidst-uproar-in-the-lok-sabha/ Wed, 29 Jul 2026 12:20:00 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=8049

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच बुधवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई। इस दौरान सदन में छात्रों के आंदोलन, जंतर-मंतर की कथित घटना और राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन कोई गुस्सा या हिंसा नहीं, बल्कि देश के युवाओं की चिंताओं की निष्पक्ष आवाज है। राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर कथित गोलीबारी का मुद्दा उठाया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाए। अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी द्वारा ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा एतराज जताया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि असंसदीय शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने साफ किया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि 2024 में एंटी-पेपर लीक कानून बनने के बाद से अब तक 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और कड़े कानून के कारण पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं के मामलों में भी कमी आई है।

सरकार का कहना है कि यह संशोधन कानून केवल सजा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा माफिया और धांधली करने वालों के खिलाफ एक कड़ा और प्रभावी ढांचा तैयार करता है। तीखी नोकझोंक और विपक्ष के वॉकआउट/हंगामे के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जिसके तुरंत बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

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शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार- सुप्रीम कोर्ट https://himalayanganesha.com/2026/07/27/peaceful-protest-is-a-constitutional-right-of-citizens-supreme-court/ Mon, 27 Jul 2026 10:14:31 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=7973

नीट विरोध प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हो रहे छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और केवल विरोध प्रदर्शन के आधार पर बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। मामले की विस्तृत सुनवाई मंगलवार को होगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा विवादों को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी प्रदर्शन के दौरान केवल भीड़ जुटने या विरोध होने के कारण पुलिस द्वारा लाठीचार्ज या अत्यधिक बल प्रयोग को सामान्य नहीं माना जा सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा। इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों की सुरक्षा समान रूप से महत्वपूर्ण है। किसी भी पक्ष के साथ हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक समान दिशा-निर्देश तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान तय किए जाएं और यदि किसी प्रदर्शन में असामाजिक तत्व शामिल हो जाएं, तो उनके खिलाफ अलग से कार्रवाई की जाए, लेकिन इसका असर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोकतंत्र अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों और अनुशासन की भी मांग करता है। उन्होंने सभी पक्षों से निष्पक्ष ढंग से अदालत की सहायता करने की अपील की। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार मामले में निष्पक्ष सहयोग करेगी।

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली में 20 जुलाई को निकाले गए एक विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। छात्रों का आरोप है कि उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसी घटना को लेकर दायर याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को विस्तृत सुनवाई करेगा।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया अपने पद से इस्तीफा https://himalayanganesha.com/2026/07/25/union-education-minister-dharmendra-pradhan-has-resigned-from-his-post/ Sat, 25 Jul 2026 09:53:47 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=7948

इस्तीफे के बाद बोले धर्मेंद्र प्रधान: “छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे”

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) को लेकर जारी विवाद और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। चौतरफा दबाव के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है। परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर उठ रहे सवालों के बीच उनके इस्तीफे को जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि विपक्षी दलों/विभिन्न संगठनों (सीजेपी) द्वारा लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। सरकार और संबंधित पक्षों के बीच वार्ता के नए दौर से ठीक पहले यह इस्तीफा सामने आया है।

इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान का वक्तव्य
इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपना पत्र साझा करते हुए लिखा:

“मेरे युवा साथियों, मैं चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधारों के प्रति समर्पित रहा हूँ। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि एक सशक्त और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।”

उन्होंने आगे कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश सेवा का अवसर मिलने के लिए आभार व्यक्त करते हैं।

NEET-UG विवाद और सरकार के कदम
NEET-UG परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि:

कड़े कदम: गड़बड़ी की बात सामने आते ही मामले की जांच तुरंत सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी।

भविष्य की योजना: शुचिता बनाए रखने के लिए आगामी सत्र से इस परीक्षा को CBT (कंप्यूटर आधारित) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

पुनः परीक्षा का सफल आयोजन: केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से 21 जून 2026 को 20 लाख से अधिक परीक्षार्थियों की पुनः परीक्षा (Re-NEET) सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई।

“छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे”
प्रयागराज और देश के अन्य हिस्सों में चल रहे आंदोलन पर बात करते हुए उन्होंने कहा:

“मैंने पहले ही दिन से इस घटनाक्रम की जिम्मेदारी ली और कभी इससे पीछे नहीं हटने का प्रयास किया। हमारा संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया की भेंट न चढ़े। हाल ही में जारी परिणामों में कई गरीब व मेधावी छात्रों को सफलता मिली है, जो हमारी पारदर्शिता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

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पेपर लीक आंदोलन में पहुंचे उत्तराखंड पुलिस के सिपाही , पुलिस महकमे में मची हलचल https://himalayanganesha.com/2026/07/24/uttarakhand-police-constables-join-the-paper-leak-protest-stir-within-the-police-department/ Fri, 24 Jul 2026 11:04:13 +0000 https://himalayanganesha.com/?p=7912

नई दिल्ली/देहरादून: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक मामले को लेकर युवाओं का विरोध-प्रदर्शन जारी है। इसी बीच उत्तराखंड पुलिस के एक सिपाही के प्रदर्शनस्थल पर पहुँचने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। शेर सिंह नाम का यह सिपाही वर्दी में ही जंतर-मंतर पहुँचा और आंदोलनकारी युवाओं के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी।

युवाओं को संबोधित करते हुए सिपाही शेर सिंह ने कहा कि देश का भविष्य सड़कों पर लाठियाँ खा रहा है, ऐसे में देश का विकास कैसे संभव है? उन्होंने दावा किया कि यदि युवाओं के साथ अन्याय बंद नहीं हुआ, तो उत्तराखंड पुलिस के सैकड़ों जवान अपनी नौकरी से इस्तीफा देकर इस आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं।

आंदोलन के दौरान शेर सिंह ने अपने आक्रोश को साझा करा। सिपाही के इस कदम और दिए गए बयानों के बाद उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मच गया है। पुलिस प्रशासन अब इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए आगे की स्थिति और विभागीय कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।

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