अंतर्राष्ट्रीय – Himalayan Ganesha https://himalayanganesha.com National News Portal Tue, 06 Oct 2026 11:42:16 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://himalayanganesha.com/wp-content/uploads/2025/09/cropped-Screenshot-2025-09-05-114937-32x32.png अंतर्राष्ट्रीय – Himalayan Ganesha https://himalayanganesha.com 32 32 होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज पर हमला, 11 भारतीय नाविक घायल https://himalayanganesha.com/2026/10/06/attack-on-commercial-ship-in-strait-of-hormuz-11-indian-sailors-injured/ Tue, 06 Oct 2026 11:42:16 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/10/06/attack-on-commercial-ship-in-strait-of-hormuz-11-indian-sailors-injured/

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

दुबई। होर्मुज जलडमरूमध्य में पनामा के झंडे वाले वाणिज्यिक जहाज एमटी ऑन पीस को निशाना बनाए जाने की घटना से समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ओमान के तट के पास हुए इस हमले में जहाज के 19 सदस्यीय चालक दल में से 12 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 11 भारतीय नागरिक शामिल हैं। भारत ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए वाणिज्यिक जहाजों, नाविकों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाने वाली घटनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

प्रोजेक्टाइल से किया गया जहाज पर हमला

विदेश मंत्रालय के अनुसार, एमटी ऑन पीस होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था, तभी उस पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। जहाज पर कुल 19 सदस्य सवार थे, जिनमें 17 भारतीय नागरिक थे। हमले के बाद घायल चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

घायलों को ओमान के खसब ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। भारत ने राहत और बचाव अभियान में सहयोग करने तथा घायल नाविकों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ओमानी अधिकारियों का आभार जताया है।

भारत ने समुद्री हमलों पर जताई गंभीर चिंता

विदेश मंत्रालय ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाने वाली घटनाएं क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि नागरिक जहाजों, चालक दल और बुनियादी ढांचे पर इस तरह के हमले तत्काल बंद होने चाहिए।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को जल्द से जल्द सुरक्षित बनाए जाने पर भी जोर दिया है।

दूसरे टैंकर को भी दी गई थी चेतावनी

यह घटना ऐसे समय हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अन्य वाणिज्यिक टैंकर को कथित तौर पर ईरानी बलों की ओर से चेतावनी दिए जाने की जानकारी सामने आई थी।

यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) के मुताबिक, सोमवार को जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक टैंकर से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के जवानों ने रेडियो के जरिए संपर्क किया था। कथित तौर पर टैंकर को रास्ता बदलने की चेतावनी दी गई और ऐसा नहीं करने पर उसे निशाना बनाए जाने की बात कही गई।

घटना ओमान के खसब से करीब 11 नॉटिकल मील उत्तर में हुई थी। जहाज के मास्टर ने निर्देशों का पालन करते हुए अपना मार्ग बदल लिया। मामले की जांच जारी है। यूकेएमटीओ ने क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देने की सलाह दी है।

समुद्री सुरक्षा पर पहले भी चिंता जता चुके हैं जयशंकर

समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा विदेश मंत्री एस जयशंकर भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में उन्होंने कहा था कि खाड़ी क्षेत्र से लेकर लाल सागर और काला सागर तक वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों पर हो रहे हमले गंभीर चिंता का विषय हैं।

जयशंकर के मुताबिक, इन घटनाओं में भारतीय नाविकों समेत कई देशों के नागरिकों की जान जा चुकी है। उन्होंने ऐसी घटनाओं को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया था।

भारत ने लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर वाणिज्यिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा के समर्थन में वैश्विक स्तर पर प्रयासों में भी भागीदारी की है।

जयशंकर ने कहा था कि जहाजों और नाविकों की सुरक्षा से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन और खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए संयम बरतने की अपील की थी, ताकि नागरिक चालक दल की सुरक्षा के साथ ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार भी प्रभावित न हो।

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यमन में फिर भड़का गृहयुद्ध, तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा, अब ताइज पर मंडरा रहा बड़ा खतरा https://himalayanganesha.com/2026/10/05/civil-war-flares-up-again-in-yemen-houthis-capture-turbah-major-threat-now-looms-over-taiz/ Mon, 05 Oct 2026 11:32:02 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/10/05/civil-war-flares-up-again-in-yemen-houthis-capture-turbah-major-threat-now-looms-over-taiz/

लाल सागर से ताइज तक हूतियों का दबदबा

सना। यमन में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दक्षिण-पश्चिमी यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तुर्बाह शहर पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद हूती अब प्रांतीय राजधानी ताइज की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। तुर्बाह पर कब्जे को सऊदी अरब समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।

हूतियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच यमन सरकार ने उनके खिलाफ बड़े सैन्य अभियान का ऐलान किया है। सरकार ने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सैनिकों की तैनाती और लामबंदी शुरू कर दी है। वहीं, सऊदी अरब ने भी यमन सरकार की सेनाओं को हरसंभव सैन्य सहयोग देने की बात कही है। करीब चार साल तक चले युद्धविराम के बाद दोनों पक्षों के बीच बढ़े तनाव ने यमन के गृहयुद्ध को फिर भड़का दिया है।

तुर्बाह पर कब्जे के बाद ताइज पर बढ़ा खतरा

रविवार को हूतियों ने तुर्बाह शहर पर नियंत्रण कर लिया। यह शहर उस महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है, जो ताइज को बंदरगाह शहर अदन से जोड़ता है। अदन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का अंतरिम केंद्र है।

तुर्बाह में पिछले कई वर्षों से सरकारी बलों की महत्वपूर्ण सैन्य मौजूदगी रही है। इसी इलाके से सरकारी सैनिक ताइज की रक्षा के लिए हूतियों के खिलाफ मोर्चा संभालते रहे हैं। ऐसे में तुर्बाह का हाथ से निकलना सरकार के लिए सैन्य और रणनीतिक, दोनों लिहाज से बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

हूती पहले ही ताइज के बाहरी इलाकों के कई गांवों और क्षेत्रों पर कब्जा कर चुके हैं। तुर्बाह पर नियंत्रण मिलने के बाद उनके लिए ताइज को अलग-अलग दिशाओं से घेरने का रास्ता और आसान हो गया है। ताइज यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और देश में इसका रणनीतिक महत्व काफी अधिक है।

लाल सागर के तट पर भी हूतियों की बढ़त

सितंबर की शुरुआत से हूतियों ने लाल सागर के पश्चिमी तट पर अपना अभियान तेज किया था। इस दौरान उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोखा शहर और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों पर नियंत्रण से हूतियों की समुद्री रणनीतिक स्थिति मजबूत हुई है और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

बाब अल-मंदब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इस संकरे जलमार्ग से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में किसी सशस्त्र समूह का इस क्षेत्र में प्रभाव बढ़ना केवल यमन तक सीमित खतरा नहीं है, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

यमन सरकार ने किया बड़े सैन्य अभियान का ऐलान

यमन सरकार ने रविवार को बयान जारी कर हूतियों के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की। सत्तारूढ़ प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने टेलीविजन संबोधन में कहा कि अभियान का उद्देश्य हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेना है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यमन सरकार को समर्थन देने की अपील भी की। इसके कुछ ही घंटे बाद सऊदी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने यमन सरकार की सेनाओं को पूर्ण सैन्य सहयोग देने का भरोसा जताया।

सऊदी पक्ष ने स्पष्ट किया कि हूतियों के खिलाफ अभियान में यमन सरकार को पूरी परिचालन सहायता दी जाएगी। साथ ही सऊदी अरब ने हूतियों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार भी जताया है।

मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ा तनाव

दोनों पक्षों के बीच तनाव पिछले कुछ महीनों में लगातार बढ़ा है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, हूतियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों ने पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और गंभीर कर दिया है।

जुलाई के मध्य में तनाव ने नया रूप लिया, जब हूतियों ने सऊदी अरब पर यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर बमबारी करने का आरोप लगाया। हूतियों के मुताबिक, सऊदी अरब ने एक अनधिकृत ईरानी विमान को उतरने से रोकने के लिए एयरपोर्ट को निशाना बनाया था।

इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब और यमन में सरकारी बलों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए। लाल सागर में सऊदी शिपिंग की नाकेबंदी की घोषणा के साथ सऊदी अरब से जुड़े कुछ जहाजों को भी निशाना बनाया गया।

तुर्बाह पर कब्जे से सरकारी बलों की सप्लाई पर असर

वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के विश्लेषण के अनुसार, तुर्बाह पर हूतियों का कब्जा ताइज में तैनात यमन सरकार समर्थक बलों के लिए सैनिकों, हथियारों और जरूरी सामान की आपूर्ति को मुश्किल बना सकता है।

तुर्बाह के उत्तर में आने-जाने वाली सड़कों पर हूतियों का नियंत्रण बढ़ने से सरकारी बलों के लिए ताइज से पीछे हटने के रास्ते भी सीमित हो सकते हैं। ऐसे में तुर्बाह पर नियंत्रण केवल एक शहर पर कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ताइज में चल रही सैन्य स्थिति पर पड़ सकता है।

2014 से जारी है यमन का गृहयुद्ध

यमन में गृहयुद्ध की शुरुआत 2014 में हुई थी, जब हूती विद्रोही अपने उत्तरी गढ़ से आगे बढ़ते हुए राजधानी सना में दाखिल हो गए थे। उन्होंने राजधानी पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद यमन सरकार को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी।

वर्षों से जारी संघर्ष ने यमन को दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में शामिल कर दिया है। अब तक इस युद्ध में 1.5 लाख से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान है।

हालिया हिंसा ने संकट को और गहरा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ताजा संघर्ष में 800 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि 3,600 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, नए संघर्ष के कारण यमन के भीतर 1.45 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। वहीं, 3,000 से अधिक लोग समुद्र पार कर जिबूती पहुंच चुके हैं।

तुर्बाह पर कब्जे के बाद ताइज की ओर हूतियों की बढ़त और इसके जवाब में सऊदी समर्थित यमन सरकार के सैन्य अभियान ने देश में लंबे समय से चले आ रहे गृहयुद्ध को एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है।

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अमेरिका में हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला, खिड़कियां टूटीं, पुजारी-श्रद्धालु थे अंदर https://himalayanganesha.com/2026/10/03/hindu-temple-in-the-us-attacked-with-bricks-windows-smashed-while-priest-and-devotees-were-inside/ Sat, 03 Oct 2026 07:04:15 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/10/03/hindu-temple-in-the-us-attacked-with-bricks-windows-smashed-while-priest-and-devotees-were-inside/

हिंदू संगठनों ने की आरोपियों पर कार्रवाई की मांग

ओहायो। अमेरिका के ओहायो राज्य में एक हिंदू मंदिर पर ईंटों से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। रिचमंड हाइट्स स्थित श्री स्वामीनारायण वडताल धाम हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया। हमले में मंदिर की इमारत और खिड़कियों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। घटना के समय मंदिर परिसर में पुजारी और श्रद्धालु मौजूद थे।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एचएएफ) ने सोशल मीडिया के माध्यम से घटना की जानकारी साझा की। संगठन के मुताबिक, हमलावरों ने मंदिर की इमारत पर कई ईंटें फेंकीं, जिससे संरचना को नुकसान पहुंचा। एचएएफ ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है।

सीसीटीवी फुटेज की पुलिस कर रही जांच

एचएएफ के अनुसार, मंदिर में लगे निगरानी कैमरों की फुटेज पुलिस के पास उपलब्ध है और अधिकारी उसके आधार पर मामले की जांच कर रहे हैं। संगठन ने बताया कि घटना की जानकारी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) और नागरिक अधिकार अधिकारियों को भी दी जा रही है। एचएएफ मंदिर प्रबंधन के संपर्क में है और आवश्यक सहायता मुहैया कराने की बात कही है।

संगठन ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की है।

धार्मिक नफरत के एंगल की भी जांच की मांग

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस घटना को संभावित हेट क्राइम के रूप में देखा है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं हुई है कि हमले के पीछे धार्मिक नफरत ही वजह थी। पुलिस की ओर से किसी संदिग्ध का नाम या गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने नहीं आई है।

एचएएफ ने अमेरिकी प्रशासन और निर्वाचित प्रतिनिधियों से भारतीय-अमेरिकी तथा हिंदू समुदाय के खिलाफ नफरत से जुड़ी बयानबाजी की सार्वजनिक रूप से निंदा करने की अपील की है।

मंदिर के अंदर मौजूद थे पुजारी और श्रद्धालु

कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) के मुताबिक, ग्रेटर क्लीवलैंड क्षेत्र में स्थित मंदिर पर ईंटें फेंकी गईं, जिससे कुछ खिड़कियां टूट गईं। घटना के दौरान मंदिर के भीतर पुजारी और श्रद्धालु मौजूद थे। हालांकि, अभी तक किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। टूटे शीशों और खिड़कियों की सटीक संख्या भी सामने नहीं आई है।

स्थानीय प्रशासन से कार्रवाई की मांग

CoHNA ने रिचमंड हाइट्स की मेयर किम थॉमस और स्थानीय प्रशासन से घटना की निंदा करने की मांग की है। संगठन ने पुलिस से जांच में तेजी लाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की है।

यह घटना ओहायो में हिंदू हेरिटेज मंथ की शुरुआत के दौरान सामने आई है। अक्टूबर में अमेरिका के कई हिंदू संगठन हिंदू विरासत माह से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसी अवधि में नवरात्रि के आयोजन भी होने हैं।

अमेरिका में पहले भी सामने आए मंदिरों से जुड़े मामले

CoHNA ने अमेरिका में हिंदू मंदिरों से संबंधित पहले की कुछ घटनाओं का भी उल्लेख किया है। रिकॉर्ड के अनुसार, अगस्त 2022 में न्यूयॉर्क के क्वींस स्थित श्री तुलसी मंदिर में महात्मा गांधी की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया गया था। दिसंबर 2023 में कैलिफोर्निया के नेवार्क स्थित एसएमवीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर में आपत्तिजनक ग्रैफिटी का मामला सामने आया था।

सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क के मेलविले और कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में बीएपीएस मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाएं दर्ज की गई थीं। इसके बाद मार्च 2025 में कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स स्थित बीएपीएस मंदिर को आपत्तिजनक संदेशों के जरिए नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया।

हालांकि, ये घटनाएं अलग-अलग मामलों के रूप में दर्ज हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर इन्हें अमेरिका में हिंदू मंदिरों के खिलाफ घटनाओं में देशव्यापी वार्षिक बढ़ोतरी का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता।

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एफबीआई के शिकंजे में अमेरिकी इंजीनियर, हूती विद्रोहियों को मदद देने का गंभीर आरोप https://himalayanganesha.com/2026/10/02/us-engineer-in-fbi-custody-faces-serious-charges-of-aiding-houthi-rebels/ Fri, 02 Oct 2026 07:50:33 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/10/02/us-engineer-in-fbi-custody-faces-serious-charges-of-aiding-houthi-rebels/

एफबीआई के मुताबिक आरोपी ने यमन की कथित गुप्त यात्रा की और हूती संगठन की संचार क्षमताओं में मदद पहुंचाने के लिए सामग्री व तकनीकी सहायता जुटाई

वॉशिंगटन। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने ऊर्जा विभाग से जुड़े एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को ईरान समर्थित हूती संगठन को कथित तौर पर सहायता पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, आरोपी पर यमन की यात्रा करने, हूती संगठन से संपर्क स्थापित करने और विस्फोटक व ड्रोन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने का आरोप है। मामले की जांच के दौरान उसके कथित संपर्कों और गतिविधियों से जुड़ी कई जानकारियां सामने आई हैं।

अमेरिकी इंजीनियर पर क्या आरोप हैं?

वॉशिंगटन राज्य के रिचलैंड निवासी 51 वर्षीय एश्टन हमीद एलाबूडी को गिरफ्तार किया गया। उसे अदालत के सामने पेश किया जाना है। अदालत के उपलब्ध रिकॉर्ड में फिलहाल उसकी ओर से पेश होने वाले किसी वकील का नाम दर्ज नहीं है।

एफबीआई के मुताबिक, एलाबूडी पर आरोप है कि वह हूती संगठन की संचार क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करना चाहता था। जांच एजेंसी के अनुसार, वह पिछले सितंबर में यमन गया था। यमन में लंबे समय से हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच संघर्ष जारी है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यमन से लौटने के बाद एलाबूडी ने सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा अधिकारियों को बताया था कि वह ओमान से काम के सिलसिले में वापस आया है। उसने कथित तौर पर यह भी बताया कि वह अमेरिकी सरकार से जुड़े एक मिशन का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य मिसाइल रक्षा प्रणालियों का निरीक्षण करना था।

सुपरवाइजर के बयान से सामने आई अलग जानकारी

एफबीआई के हलफनामे में कहा गया है कि जांचकर्ताओं ने एलाबूडी के सुपरवाइजर से पूछताछ की। सुपरवाइजर ने कथित तौर पर बताया कि उन्हें एलाबूडी की किसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा विभाग में उनकी जानकारी के मुताबिक ऐसा कोई मिसाइल निरीक्षण कार्यक्रम नहीं था, जिसके तहत एलाबूडी को यमन या ओमान भेजा गया हो।

जांच एजेंसी के मुताबिक, उसके मुखबिरों ने एलाबूडी के साथ हुई कुछ बातचीत रिकॉर्ड की थी। इन बातचीत में उसने कथित तौर पर बताया कि उसे यमन में गुप्त तरीके से प्रवेश करना और वहां से बाहर निकलना पड़ा। उसने यमन की राजधानी सना पहुंचकर वहां उच्च स्तर पर संपर्क स्थापित करने की इच्छा भी जताई थी। हालांकि, एफबीआई के अनुसार वह सना पहुंचने में सफल नहीं हो सका।

विस्फोटक और ड्रोन की सामग्री खरीदने का आरोप

एफबीआई के अनुसार, एलाबूडी के खिलाफ जांच उस समय शुरू हुई जब अधिकारियों को उसके द्वारा कुछ ऐसे रसायनों की खरीदारी की जानकारी मिली, जिनका इस्तेमाल घरेलू स्तर पर विस्फोटक उपकरण तैयार करने में किया जा सकता है। इनमें एसीटोन और सोडियम बाइसल्फेट शामिल बताए गए हैं। जांच में ड्रोन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कुछ पुर्जों की खरीद का भी उल्लेख किया गया है।

जांच के दौरान एलाबूडी ने कथित तौर पर कई मुखबिरों से संपर्क किया। एफबीआई के मुताबिक, इनमें एक व्यक्ति ऐसा भी था जिसने खुद को हूती कर्नल के रूप में पेश किया था। एजेंसी का आरोप है कि एलाबूडी ने संचार उपकरणों से जुड़ी सलाह और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई।

किस कानून के तहत हुई कार्रवाई?

अमेरिकी अधिकारियों ने एलाबूडी पर उस कानून के तहत आरोप लगाया है, जिसके तहत अमेरिका द्वारा विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किए गए किसी समूह को भौतिक सहायता उपलब्ध कराना अपराध है। मामले में लगाए गए आरोप एफबीआई की जांच और अदालत में पेश किए गए हलफनामे पर आधारित हैं। आगे की कानूनी कार्यवाही में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर अदालत में विचार किया जाएगा।

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सीरिया में यात्री बस पर अंधाधुंध गोलीबारी, 7 लोगों की मौत, 4 घायल https://himalayanganesha.com/2026/10/01/indiscriminate-firing-on-passenger-bus-in-syria-7-dead-4-injured/ Thu, 01 Oct 2026 11:10:14 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/10/01/indiscriminate-firing-on-passenger-bus-in-syria-7-dead-4-injured/

सुरक्षा व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश का संदेह

सीरिया। सीरिया में हिंसा की एक और घटना सामने आई है। देश के होम्स प्रांत में एक यात्री बस पर अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी। इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। फिलहाल हमले के पीछे किसका हाथ है और इसके पीछे क्या वजह रही, इसका पता नहीं चल पाया है।

सरकारी समाचार एजेंसी सना (SANA) के अनुसार, यह हमला पश्चिमी सीरिया के होम्स प्रांत में मस्याफ पुल के नजदीक हुआ। हमलावरों ने एक छोटी यात्री बस को निशाना बनाया। घटना के समय बस में कई लोग सवार थे। किसी भी संगठन ने अब तक इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

काम खत्म कर घर लौट रहे थे बस में सवार कर्मचारी

अधिकारियों के मुताबिक, बस में सवार सभी लोग एक कंपनी में काम करते थे। वे अपना काम खत्म करने के बाद घर लौट रहे थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने बस पर गोलियां बरसा दीं। अचानक हुई गोलीबारी में कई लोग इसकी चपेट में आ गए। हमले में सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद होम्स शहर के आसपास स्थित अस्पतालों में भर्ती कराया गया। वहीं, सुरक्षा बलों ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। बस के भीतर खून के निशान और टूटे हुए शीशे मिले हैं।

सुरक्षा व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश का संदेह

होम्स की आंतरिक सुरक्षा बलों के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल बासेम मोहम्मद शाबान ने सरकारी समाचार एजेंसी सना को बताया कि इस हमले को क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और अस्थिरता फैलाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक किसी भी व्यक्ति या संगठन को हमले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

लंबे गृहयुद्ध के बाद भी सीरिया में हिंसा जारी

सीरिया में 13 साल से अधिक समय तक चले गृहयुद्ध के बाद भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सत्ता समाप्त होने के बाद देश में राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था को स्थिर करने की कोशिशें जारी हैं। इसके बावजूद विभिन्न इलाकों में गोलीबारी और विस्फोट जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।

सीरियाई अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने कई संभावित हमलों और सशस्त्र समूहों की गतिविधियों को नाकाम किया है। इसके बावजूद राजधानी दमिश्क समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसक घटनाएं हो रही हैं। होम्स में यात्री बस पर हुआ ताजा हमला भी सुरक्षा व्यवस्था के सामने बनी चुनौती को दर्शाता है।

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भारतीय दवा कंपनियों के लिए खुशखबरी, अमेरिका में इन दवाओं पर नहीं लगेगा टैरिफ https://himalayanganesha.com/2026/09/28/good-news-for-indian-pharmaceutical-companies-these-drugs-will-not-be-subject-to-tariffs-in-the-us/ Mon, 28 Sep 2026 06:33:01 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/09/28/good-news-for-indian-pharmaceutical-companies-these-drugs-will-not-be-subject-to-tariffs-in-the-us/

जानिए किन दवाओं को मिली छूट

वॉशिंगटन। भारत की दवा कंपनियों को अमेरिका से बड़ी राहत मिली है। अमेरिका ने भारत से आयात की जाने वाली कुछ विशेष दवाओं और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर शून्य प्रतिशत टैरिफ लागू करने का फैसला किया है। इससे भारतीय फार्मा कंपनियों को अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों की आपूर्ति करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह छूट सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी। अमेरिका ने इसके लिए कुछ खास दवाओं और चिकित्सा उत्पादों की सूची जारी की है।

किन दवाओं को मिलेगी टैरिफ से छूट?

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने यह सूची ऐसे समय में जारी की है, जब अमेरिका 29 सितंबर से कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे संबंधित सामग्री के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, भारत से निर्यात होने वाले सभी फार्मास्युटिकल उत्पादों को इस फैसले का लाभ नहीं मिलेगा। यह छूट केवल उन्हीं दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों पर लागू होगी, जिन्हें अप्रैल में जारी अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश में शामिल किया गया था।

इस सूची में दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं (ऑर्फन ड्रग्स), न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा से तैयार थेरेपी, प्रजनन क्षमता से जुड़ी दवाएं, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स शामिल हैं। इसके अलावा रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से निपटने के लिए इस्तेमाल होने वाले चिकित्सा उत्पादों के साथ पशु स्वास्थ्य से जुड़े कुछ उत्पादों को भी इस छूट के दायरे में रखा गया है।

भारत के अलावा इन देशों को भी मिलेगी छूट

अमेरिकी वाणिज्य विभाग की ओर से जारी सूची में भारत के साथ कई अन्य देशों को भी शामिल किया गया है। इनमें अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।

अमेरिकी विभाग के अनुसार, इन देशों से आयात किए जाने वाले पात्र उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैरिफ लागू किया जा सकता है। इसके पीछे अमेरिका के साथ मौजूदा या भविष्य में होने वाले व्यापार और सुरक्षा समझौतों को आधार बनाया गया है।

ट्रंप के टैरिफ आदेश से जुड़ा है फैसला

दवाओं पर टैरिफ में छूट का यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अप्रैल में जारी किए गए आदेश के तहत लिया गया है। इस आदेश में ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के अंतर्गत फार्मास्युटिकल उत्पादों और उनसे संबंधित सामग्री के आयात पर नए नियम लागू किए गए थे।

इसके तहत कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले घटकों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया। यह व्यवस्था सूची में शामिल कुछ कंपनियों के लिए 31 जुलाई से लागू हो चुकी है, जबकि अन्य कंपनियों के लिए इसे 29 सितंबर से लागू किया जाना है।

हालांकि, अमेरिकी वाणिज्य विभाग के नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जेनेरिक दवाओं और उनसे जुड़े कच्चे माल पर धारा 232 के तहत लगाए गए दवा टैरिफ लागू नहीं होंगे। भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि अमेरिका को होने वाले भारतीय दवा निर्यात में जेनेरिक दवाओं की बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां पेटेंट वाली दवाओं, सक्रिय औषधीय घटकों और विशेष उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का भी उत्पादन करती हैं।

भारतीय फार्मा कंपनियों को क्या होगा फायदा?

अमेरिका के इस फैसले से भारतीय दवा निर्माता कंपनियों को कुछ महंगी और विशेष चिकित्सा उपचारों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का निर्यात बिना अतिरिक्त टैरिफ के जारी रखने का अवसर मिलेगा। इससे अमेरिकी बाजार में इन उत्पादों की आपूर्ति करने वाली भारतीय कंपनियों को राहत मिल सकती है।

भारत दुनिया के प्रमुख जेनेरिक दवा निर्माताओं में शामिल है और अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। भारतीय कंपनियां अमेरिका को तैयार दवाओं के साथ-साथ सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई) की भी आपूर्ति करती हैं। इनका इस्तेमाल वहां के अस्पतालों, फार्मेसियों और मरीजों के इलाज में किया जाता है।

ऐसे में अमेरिका का यह फैसला भारत और अमेरिका के बीच दवा व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, टैरिफ से मिली राहत सीमित उत्पादों तक ही रहेगी। दूसरी ओर, अमेरिका अपनी घरेलू दवा निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए आयात पर शुल्क लगाने की नीति पर भी काम कर रहा है।

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बांग्लादेश में ड्रम के अंदर मिला हिंदू ज्वैलर का शव, सिर-छाती पर धारदार हथियार के निशान https://himalayanganesha.com/2026/09/26/body-of-hindu-jeweler-found-inside-a-drum-in-bangladesh-sharp-weapon-marks-on-head-and-chest/ Sat, 26 Sep 2026 10:20:34 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/09/26/body-of-hindu-jeweler-found-inside-a-drum-in-bangladesh-sharp-weapon-marks-on-head-and-chest/

ढाका। बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में एक हिंदू व्यक्ति का शव ड्रम के अंदर पानी में तैरता मिला। घटना बेगुनबाड़ी इलाके की है, जहां स्लूइस गेट के पास नहर में स्थानीय लोगों ने ड्रम देखा और पुलिस को सूचना दी। मृतक की पहचान 50 वर्षीय निरंजन चंद्र सूत्रधार के रूप में हुई है।

निरंजन मयमनसिंह के अठारबारी बिल्डिंग इलाके में साझेदारी में ज्वैलरी शॉप चलाते थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस अभी यह पता नहीं लगा सकी है कि उनकी हत्या किसने की और इसके पीछे क्या वजह थी। शुक्रवार तक मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

कोतवाली मॉडल पुलिस स्टेशन के ओसी मुहम्मद शिबिरुल इस्लाम के अनुसार, निरंजन के सिर और छाती पर धारदार हथियार से चोट के निशान मिले हैं। पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है कि हत्या करने के बाद शव को ड्रम में डालकर पानी में फेंका गया।

पुलिस को शव की पैंट की जेब से मयमनसिंह हिंदू कोऑपरेटिव क्रेडिट यूनियन लिमिटेड का एक टोकन मिला। संस्था से संपर्क करने पर मृतक की पहचान निरंजन चंद्र के रूप में हुई। इसके बाद उनकी पत्नी सुमिता रानी सूत्रधार और बेटे जॉय सूत्रधार ने शव की पहचान की।

सब-इंस्पेक्टर रूहुल अमीन के मुताबिक, बुधवार सुबह बेगुनबाड़ी इलाके में नहर के पानी में ड्रम तैरता दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को जानकारी दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने ड्रम से शव बरामद किया।

इस घटना के बाद बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठे हैं। अवामी लीग ने भी देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने मंदिरों पर हमले, घरों में आगजनी, जमीन पर कब्जे और महिलाओं के खिलाफ हिंसा सहित कई आरोप लगाए हैं।

अवामी लीग ने रंगपुर में सेवानिवृत्त हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके परिवार की हत्या का भी उल्लेख करते हुए सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है। पार्टी ने इन घटनाओं को पिछली अंतरिम सरकार के दौर से जारी अल्पसंख्यक उत्पीड़न के पैटर्न से जोड़ा है। ये आरोप अवामी लीग की ओर से लगाए गए हैं।

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ट्रंप के फैसले को कोर्ट का झटका, सीएनएन समेत तीनों मीडिया संस्थानों की व्हाइट हाउस में एंट्री बहाल https://himalayanganesha.com/2026/09/24/court-deals-a-blow-to-trumps-decision-white-house-access-restored-for-three-media-outlets-including-cnn/ Thu, 24 Sep 2026 10:25:09 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/09/24/court-deals-a-blow-to-trumps-decision-white-house-access-restored-for-three-media-outlets-including-cnn/

सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों को मिली अस्थायी राहत

वॉशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। संघीय जिला न्यायाधीश टिमोथी केली ने सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस से बाहर रखने के प्रशासन के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने प्रशासन को तीनों संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है। यह अस्थायी आदेश 14 दिनों तक प्रभावी रहेगा, जब तक अदालत की ओर से इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाता।

ट्रंप प्रशासन ने क्यों लगाया था प्रतिबंध?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के व्हाइट हाउस प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग को ‘फेक न्यूज’ बताते हुए उन पर उनके प्रशासन और राष्ट्रपति के बारे में गलत खबरें प्रकाशित करने का आरोप लगाया था। इसके अगले दिन तीनों संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश नहीं दिया गया और उनके प्रेस क्रेडेंशियल्स निष्क्रिय कर दिए गए।

इसके बाद सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको ने संघीय अदालत का रुख किया। मीडिया संस्थानों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पूर्व सूचना और अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना व्हाइट हाउस से बाहर किया गया। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई प्रेस की स्वतंत्रता और उचित कानूनी प्रक्रिया से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

सुनवाई में जज ने किस मुद्दे पर सवाल उठाए?

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश टिमोथी केली ने मुख्य रूप से इस बात पर सवाल किया कि पत्रकारों के प्रेस पास रद्द करने से पहले प्रशासन ने उचित प्रक्रिया का पालन किया था या नहीं। अदालत ने पहले के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच खत्म करने से पहले उन्हें नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

इसके बाद न्यायाधीश ने तीनों मीडिया संस्थानों के पक्ष में अस्थायी राहत देते हुए प्रशासन को उनके पत्रकारों की पहुंच बहाल करने का आदेश दिया। अदालत ने माना कि मीडिया संस्थानों के पास यह दावा करने का मजबूत आधार है कि उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया से वंचित किया गया।

प्रशासन ने अदालत में क्या दलील दी?

ट्रंप प्रशासन की ओर से न्याय विभाग ने प्रतिबंध का बचाव करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस में पत्रकारों का प्रवेश असीमित अधिकार नहीं है। प्रशासन का तर्क था कि राष्ट्रपति कार्यालय और निवास परिसर में प्रवेश को लेकर कुछ नियम और सीमाएं तय की जा सकती हैं।

सरकार ने पत्रकारों की पहुंच सीमित करने के समर्थन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का भी हवाला दिया। प्रशासन का कहना था कि राष्ट्रपति को व्हाइट हाउस के संवेदनशील हिस्सों और वहां होने वाली गतिविधियों की कवरेज को नियंत्रित करने का अधिकार है।

हालांकि, अदालत ने फिलहाल प्रशासन की दलीलों के बावजूद प्रतिबंध लागू रखने की अनुमति नहीं दी और पत्रकारों के प्रेस पास बहाल करने का निर्देश दिया।

मीडिया संस्थानों ने क्या कहा?

सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको ने अदालत में कहा कि उन्हें उनके कवरेज के कारण निशाना बनाया गया और बिना उचित प्रक्रिया के व्हाइट हाउस की पहुंच छीन ली गई। तीनों संस्थानों ने अपने संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए अदालत से तत्काल राहत की मांग की थी।

मीडिया संस्थानों की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि प्रशासन ने प्रतिबंध की घोषणा करते समय रिपोर्टिंग को लेकर आपत्ति जताई थी, जबकि बाद में अदालत में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तर्क सामने रखे गए। इसी वजह से सुनवाई के दौरान प्रतिबंध के आधार और अपनाई गई प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठे।

अब आगे क्या होगा?

अदालत के ताजा आदेश के बाद सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस की पहुंच फिर से मिलनी है। हालांकि यह अंतिम फैसला नहीं है। फिलहाल अदालत ने 14 दिनों के लिए अस्थायी राहत दी है और इसी अवधि में मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन

18 सितंबर: ट्रंप ने सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको पर व्हाइट हाउस से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।

19 सितंबर: तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोका गया और उनके प्रेस पास निष्क्रिय किए गए।

21 सितंबर: तीनों संस्थानों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर कर राहत की मांग की।

23 सितंबर: सुनवाई के दौरान न्यायाधीश टिमोथी केली ने पत्रकारों की पहुंच खत्म करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

24 सितंबर: अदालत ने ट्रंप प्रशासन को तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास बहाल करने और व्हाइट हाउस पहुंच देने का आदेश दिया। अस्थायी आदेश 14 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा।

फिलहाल इस मामले में मुख्य कानूनी सवाल व्हाइट हाउस में पत्रकारों की पहुंच, प्रेस की स्वतंत्रता और सरकार की ओर से प्रेस क्रेडेंशियल्स वापस लेने की प्रक्रिया से जुड़े हैं। अदालत का ताजा आदेश इन सवालों पर अंतिम फैसला नहीं है, लेकिन इससे तीनों मीडिया संस्थानों को फिलहाल व्हाइट हाउस कवरेज जारी रखने की अनुमति मिल गई है।

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अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का बड़ा हवाई हमला, तीन लोगों की मौत, कई घायल https://himalayanganesha.com/2026/09/21/major-pakistani-airstrike-on-afghanistan-three-dead-many-injured/ Mon, 21 Sep 2026 06:36:12 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/09/21/major-pakistani-airstrike-on-afghanistan-three-dead-many-injured/

तालिबान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

कुनार। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान ने सोमवार को अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में हवाई कार्रवाई की, जिसमें कुनार प्रांत में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, हमले में एक इमारत भी क्षतिग्रस्त हुई है।

कुनार में पाकिस्तानी हवाई हमला

अफगान मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से यह हवाई हमला कुनार प्रांत के नुरगल जिले में सुबह करीब तीन बजे किया गया। इसके अलावा पड़ोसी पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में भी दो हवाई हमलों की सूचना सामने आई है। पक्तिका में फिलहाल किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है।

पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि कार्रवाई का निशाना कथित आतंकी ठिकाने थे। पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) समेत कुछ सशस्त्र समूह अफगानिस्तान की जमीन से उसके खिलाफ गतिविधियां संचालित करते हैं। हालांकि, काबुल इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।

पुलिस परिसर पर हमले के बाद बढ़ा तनाव

यह हवाई कार्रवाई पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक पुलिस परिसर पर हुए घातक हमले के दो दिन बाद हुई है। कोहाट में हुए हमले में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। हमले की जिम्मेदारी तत्काल किसी संगठन ने नहीं ली, लेकिन पाकिस्तान में टीटीपी पर संदेह जताया गया।

ताजा हवाई हमले ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से चले आ रहे तनाव को फिर बढ़ा दिया है। फरवरी में भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कई वर्षों का सबसे गंभीर सैन्य टकराव हुआ था।

तालिबान ने पाकिस्तान को दी थी चेतावनी

पाकिस्तान की संभावित सैन्य कार्रवाई से पहले तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस्लामाबाद को अफगानिस्तान की सीमा के भीतर हमला नहीं करने की चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि अगर अफगान क्षेत्र पर सैन्य कार्रवाई की गई तो काबुल अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जवाब देगा।

मुजाहिद ने पाकिस्तान के उन आरोपों को भी खारिज किया था, जिनमें कहा जाता है कि अफगानिस्तान में मौजूद चरमपंथी संगठन पाकिस्तान के खिलाफ हमलों की तैयारी करते हैं और उन्हें प्रशिक्षण या समर्थन मिलता है।

टीटीपी को लेकर दोनों देशों में मतभेद

पाकिस्तान लंबे समय से अफगान तालिबान प्रशासन पर टीटीपी के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाता रहा है। वहीं, तालिबान प्रशासन का कहना है कि वह अफगान जमीन को किसी दूसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल होने की अनुमति नहीं देता। काबुल ने पाकिस्तान में होने वाली हिंसा को उसकी आंतरिक सुरक्षा समस्या बताया है।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद सिर्फ टीटीपी तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच सीमा और सुरक्षा को लेकर भी लंबे समय से मतभेद रहे हैं। हालिया हवाई हमलों के साथ सीमा क्षेत्र में भी गोलीबारी की खबरें सामने आई हैं।

बातचीत का रास्ता अभी खुला

सैन्य कार्रवाई को लेकर कड़ी चेतावनियों के बावजूद अफगान पक्ष ने बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया है। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए संवाद और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे उपायों पर चर्चा की जरूरत बताई गई है।

इस बीच पाकिस्तान की ताजा कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। क्षेत्रीय स्तर पर चीन, कतर और तुर्किये समेत कई पक्ष पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत और तनाव कम करने की कोशिशों में शामिल रहे हैं।

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ट्रंप ने रूस-ईरान पर नए प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत-चीन पर 100% टैरिफ का रास्ता खुला https://himalayanganesha.com/2026/09/19/trump-signs-new-sanctions-law-targeting-russia-and-iran-paves-the-way-for-100-tariffs-on-india-and-china/ Sat, 19 Sep 2026 05:02:11 +0000 https://himalayanganesha.com/2026/09/19/trump-signs-new-sanctions-law-targeting-russia-and-iran-paves-the-way-for-100-tariffs-on-india-and-china/

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले नए कानून ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षरित इस कानून के बाद अमेरिकी प्रशासन को रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले कुछ देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की व्यापक शक्ति मिल गई है।

नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद करने वाले कुछ देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की व्यवस्था है। इस प्रावधान के संभावित दायरे में रूस के बड़े ऊर्जा खरीदारों में शामिल भारत और चीन भी आ सकते हैं। हालांकि, दोनों देशों पर स्वतः 100 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं होगा। टैरिफ लगाना है या नहीं और इसकी दर कितनी होगी, इसका फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति करेंगे।

रूसी ऊर्जा खरीद पर बढ़ेगा अमेरिकी दबाव

कानून के तहत उन देशों पर कार्रवाई की जा सकती है, जो कानून लागू होने से पहले के 12 महीनों में कुल खरीद के आधार पर रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदारों में शामिल रहे हों।

इस प्रावधान से अमेरिका को रूस के ऊर्जा कारोबार से जुड़े देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का अतिरिक्त अधिकार मिलेगा। कानून राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में निर्धारित प्रतिबंधों से छूट देने का अधिकार भी देता है।

गैस खरीद को लेकर विशेष छूट का प्रावधान

प्राकृतिक गैस से जुड़े टैरिफ के मामले में कानून में एक विशेष अपवाद रखा गया है। यदि किसी देश का रूसी गैस आयात संबंधित अवधि में रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम रहा हो और उस देश ने रूसी गैस की खरीद कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हों, तो उसे गैस संबंधी शुल्क से छूट मिल सकती है।

रूस की ‘शैडो फ्लीट’ भी कानून के निशाने पर

नए कानून में रूस की तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े लोगों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें ऐसे जहाजों और उनसे जुड़े नेटवर्क को निशाना बनाया जा सकता है, जिन पर रूसी ऊर्जा कारोबार को जारी रखने या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने में मदद करने के आरोप हैं।

इसके अलावा रूस के रक्षा उद्योग से जुड़े सहयोगियों और प्रतिबंधों से बचने में सहायता करने वाले विदेशी पक्षों के खिलाफ भी कार्रवाई का रास्ता कानून में रखा गया है।

30 दिन के भीतर प्रभावी होगा कानून

व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप ने H.R. 5334 को कानून का रूप दिया है। यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिन के भीतर प्रभावी होगा।

नए प्रावधानों के लागू होने के बाद रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों के साथ अमेरिकी व्यापार पर संभावित अतिरिक्त शुल्क का असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, भारत या चीन पर वास्तविक टैरिफ लगाया जाएगा या नहीं और यदि लगाया गया तो उसकी दर क्या होगी, यह अमेरिकी राष्ट्रपति के आगामी फैसले पर निर्भर करेगा।

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